“एक अधूरी मुलाकात”
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शाम का समय था… हल्की हवा चल रही थी।

विपिन रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़ा था, जैसे किसी का इंतज़ार कर रहा हो… और सच में वो इंतज़ार था— ज्योति का।

कई महीनों बाद आज दोनों मिलने वाले थे।

???? पहली झलक

ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म पर रुकी…

भीड़ में से एक चेहरा सामने आया— वही मुस्कान, वही सादगी…

“ज्योति…” विपिन के होंठों से बस इतना ही निकला।

ज्योति ने हल्की सी मुस्कान दी,

“कैसे हो?”

इतने दिनों की दूरी बस इन दो शब्दों में सिमट गई।

???? अनकही बातें

दोनों स्टेशन के एक कोने में बैठ गए।

बातें शुरू हुईं, लेकिन दिल की बातें अभी भी चुप थीं।

विपिन कहना चाहता था—

“मैं आज भी तुमसे प्यार करता हूँ…”

ज्योति भी कहना चाहती थी—

“मैंने तुम्हें कभी भुलाया ही नहीं…”

लेकिन दोनों के बीच खामोशी बैठी थी।

???? सच सामने आया

कुछ देर बाद ज्योति ने धीरे से कहा—

“मेरी शादी तय हो गई है…”

जैसे वक्त अचानक रुक गया।

विपिन बस उसे देखता रह गया…

कुछ बोल नहीं पाया।

दिल में तूफान था, लेकिन चेहरे पर शांति।

????️ आखिरी पल

ट्रेन फिर से चलने लगी थी।

ज्योति उठी… जाने के लिए।

विपिन ने बस इतना कहा—

“खुश रहना…”

ज्योति की आंखों में आंसू थे,

लेकिन वो मुस्कुरा कर बोली—

“तुम भी…”

✨ अंत… या शुरुआत?

ट्रेन चली गई…

विपिन वहीं खड़ा रहा, जैसे कुछ पीछे छूट गया हो।

प्यार कभी खत्म नहीं होता…

बस लोग दूर हो जाते हैं।

कुछ कहानियां साथ खत्म नहीं होतीं…

बस याद बनकर हमेशा साथ रहती हैं। ????

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