समय धीरे-धीरे बीत गया…
राहुल अब पहले जैसा नहीं रहा था। वो थोड़ा खामोश, थोड़ा गंभीर हो गया था। उसने अपनी जिंदगी को काम में लगा दिया, लेकिन दिल का एक कोना आज भी खाली था—जहाँ सिर्फ प्रिया रहती थी।
उधर, प्रिया की भी जिंदगी आसान नहीं थी। शादी के बाद उसने सब निभाने की कोशिश की… लेकिन दिल को समझाना आसान नहीं होता।
एक दिन…
बारिश हो रही थी। स्टेशन वही था… वही प्लेटफॉर्म… वही ट्रेन।
राहुल छाता लिए खड़ा था, जैसे हमेशा खड़ा रहता था।
तभी अचानक उसकी नजर एक चेहरे पर जाकर रुक गई…
दिल की धड़कन तेज हो गई।
वो… प्रिया थी।
सालों बाद… बिल्कुल सामने।
प्रिया भी उसे देख रही थी। दोनों की आंखों में एक ही सवाल था— "क्या ये सच है?"
कुछ पल के लिए सब रुक सा गया—बारिश, भीड़, आवाजें…
राहुल धीरे-धीरे उसके पास गया— “कैसी हो… प्रिया?”
प्रिया की आंखों में आंसू आ गए— “ठीक हूँ… और तुम?”
“ठीक हूँ…” (लेकिन उसकी आवाज बता रही थी कि वो ठीक नहीं है)
दोनों कुछ देर चुप रहे।
फिर राहुल ने हिम्मत करके पूछा— “खुश हो?”
प्रिया ने जवाब देने से पहले नजरें झुका लीं… “कोशिश करती हूँ…”
ये सुनकर राहुल के दिल में एक चुभन सी हुई।
बारिश तेज हो गई थी…
दोनों प्लेटफॉर्म के किनारे खड़े थे।
“तुम बदले नहीं…” प्रिया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।
राहुल हंस पड़ा— “तुम भी नहीं… बस थोड़ी सी उदास हो गई हो।”
दोनों फिर हंस दिए… लेकिन इस बार उस हंसी में दर्द था।
फिर वो सवाल आया… जो सालों से अधूरा था…
राहुल बोला— “अगर उस दिन… तुम चली ना जाती… तो क्या हम साथ होते?”
प्रिया ने उसकी आंखों में देखा… “शायद… हाँ।”
ये “शायद” ही उनकी पूरी कहानी था।
ट्रेन आने वाली थी…
लाउडस्पीकर की आवाज गूंज रही थी।
प्रिया ने धीरे से कहा— “जिंदगी ने हमें दूसरी राह दे दी… लेकिन दिल आज भी वही है।”
राहुल ने कहा— “मैंने कभी तुम्हें भुलाया ही नहीं…”
प्रिया की आंखों से आंसू बहने लगे।
ट्रेन आ गई…
इस बार फैसला अलग था।
प्रिया ने कदम आगे बढ़ाए… फिर रुक गई।
उसने पीछे मुड़कर राहुल को देखा।
“क्या इस बार भी हम बस ऐसे ही अलग हो जाएंगे?”
राहुल चुप रहा… लेकिन उसकी आंखों में जवाब था—नहीं।
प्रिया धीरे-धीरे वापस उसकी तरफ आई।
दोनों एक-दूसरे के सामने खड़े थे।
बारिश अब भी हो रही थी… लेकिन इस बार कोई नहीं हिला।
कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई…
क्योंकि कुछ प्यार ऐसे होते हैं— जो समय से हारते नहीं…
बस… सही पल का इंतजार करते हैं ❤️